ऑनलाइन गेमिंग Fantasy Apps बैन: करोड़ों यूजर्स को सरकार का तगड़ा झटका – जानें पूरी खबर!
नई दिल्ली, अगस्त 2025 – भारत सरकार ने हाल ही में ऑनलाइन गेमिंग रेग्युलेशन एंड प्रमोशन बिल 2025 पास कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद अब देशभर में रियल–मनी ऑनलाइन गेम्स (जहाँ असली पैसे लगते हैं) पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसमें Dream11, MPL, Zupee, My11Circle, PokerBaazi, WinZO जैसे लोकप्रिय ऐप्स भी शामिल हैं।

अब यूजर्स अपना पैसा कैसे निकाल पाएंगे?
कंपनियों ने अपने यूजर्स को भरोसा दिलाया है कि उनका वॉलेट बैलेंस सुरक्षित है। खिलाड़ी अपने अकाउंट से पैसा निकाल सकते हैं, लेकिन नए डिपॉजिट फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। सभी ऐप्स ने बैंक विदड्रॉल और वॉलेट ट्रांसफर का विकल्प जारी रखा है ताकि किसी का पैसा फंसे नहीं।
सरकार ने ये ऐप्स क्यों बैन किए?
सरकार का कहना है कि इन गेम्स से युवाओं में लत बढ़ रही थी, जुए जैसी प्रवृत्ति पनप रही थी और कई लोग कर्ज़ और मानसिक तनाव का शिकार हो रहे थे। इसके अलावा, कुछ कंपनियों पर टैक्स चोरी और अवैध कमाई के आरोप भी सामने आए। इसी वजह से इन्हें बंद करना ज़रूरी माना गया।
नया कानून क्या कहता है?
नए कानून के तहत किसी भी तरह का रियल-मनी गेम खेलना या चलाना गैरकानूनी है। इस नियम का उल्लंघन करने पर ₹1 करोड़ तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। साथ ही इन ऐप्स का प्रचार-प्रसार या विज्ञापन करना भी अपराध माना जाएगा।
बिल कब और कैसे पास हुआ?
यह बिल 21 अगस्त 2025 को संसद के दोनों सदनों में पास हुआ और अगले ही दिन राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। इसके बाद 25 अगस्त 2025 से यह कानून लागू हो गया।
जनता की प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कई यूजर्स नाराज़ हैं कि उनका पसंदीदा गेमिंग और मनोरंजन का साधन छिन गया। दूसरी ओर, माता-पिता और समाज के कई वर्गों ने राहत जताई है कि अब युवाओं का पैसा और समय इन गेम्स में बर्बाद नहीं होगा। हालांकि, इस कदम से गेमिंग इंडस्ट्री और स्टार्टअप सेक्टर को भारी नुकसान हुआ है। ड्रीम11 जैसी कंपनियों को बड़े पैमाने पर घाटा झेलना पड़ रहा है और हजारों नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। इतना ही नहीं, ड्रीम11 ने BCCI के साथ अपना ₹358 करोड़ का स्पॉन्सरशिप डील भी रद्द कर दिया है।
कुल मिलाकर, सरकार का मानना है कि यह फैसला युवाओं को जुए जैसी आदतों से बचाने और ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को सुरक्षित दिशा में ले जाने के लिए ज़रूरी था। हालांकि, करोड़ों खिलाड़ियों और कंपनियों के लिए यह बड़ा झटका साबित हुआ है।