पंतनगर (उत्तराखंड), 12 सितंबर 2025: गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GBPUAT), पंतनगर से शुक्रवार को एक दुखद घटना सामने आई है। विश्वविद्यालय के जनरल बिपिन रावत भवन हॉस्टल में निवास करने वाले 20 वर्षीय नीरज, पुत्र छोटे लाल, निवासी दरऊ, किच्छा (उत्तराखंड) ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे परिसर और स्थानीय क्षेत्र को गहरे शोक में डाल दिया है।

घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में नीरज ने लिखा था कि उसे अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करना कठिन लग रहा था और इसी कारण वह मानसिक तनाव में था।
घटना का विवरण
शुक्रवार सुबह लगभग 9:30 बजे सभी छात्र अपनी-अपनी कक्षाओं के लिए निकल गए। नीरज ने साथियों से कहा था कि उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा और वह कमरे में रुकेगा।

दोपहर लगभग 1:30 बजे जब उसके साथी लंच के लिए वापस लौटे, तो उन्होंने नीरज को आवाज लगाई। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था और कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद हॉस्टल प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई। दरवाजा तोड़ने के बाद नीरज का शव फांसी की स्थिति में मिला।
पीड़ित की पहचान
व्यक्तिगत विवरण:
- नाम: नीरज
- आयु: 20 वर्ष
- पिता: छोटे लाल
- निवास: ग्राम दरऊ, किच्छा (उत्तराखंड)
- कोर्स: B.Tech छात्र, GBPUAT पंतनगर
नीरज का सपना इंजीनियर बनने का था। परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई पूरी करके उज्ज्वल भविष्य की नींव रखे। किंतु इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे परिवार और गांव को गहरे दुख में डुबो दिया है।
सुसाइड नोट की सामग्री
सुसाइड नोट के अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि नीरज दीर्घकाल से मानसिक दबाव में था। उसने लिखा था कि:
- अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई उसके लिए अत्यधिक कठिन थी
- विषयों की समझ और असाइनमेंट पूरा करने में कठिनाई हो रही थी
- यह दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा था और वह स्वयं को असहाय महसूस कर रहा था
यह संदेश शिक्षा व्यवस्था और समाज के लिए गंभीर प्रश्न उठाता है।
भाषाई चुनौती और शिक्षा
भारत में लाखों छात्र हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करके उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेते हैं। अचानक अंग्रेजी माध्यम के वातावरण में यह परिवर्तन अक्सर चुनौतीपूर्ण सिद्ध होता है:
- तकनीकी और इंजीनियरिंग जैसे जटिल विषयों को अंग्रेजी में समझना कठिन होता है
- छात्र स्वयं को अन्य छात्रों से हीनभावना से ग्रसित महसूस करने लगते हैं
- यह दबाव मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है
शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी
इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं:
- मानसिक स्वास्थ्य परामर्श: प्रत्येक विश्वविद्यालय में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र स्थापित होना चाहिए
- भाषाई सहायता कार्यक्रम: अंग्रेजी में कमजोर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं और भाषा सुधार कार्यशालाएं आयोजित करनी चाहिए
- संवेदनशील शिक्षण: शिक्षकों को छात्रों के मानसिक दबाव को पहचानकर उचित सहायता प्रदान करनी चाहिए
- सहायता समूह: छात्रों के लिए सहयोग समूह बनाए जाने चाहिए जहां वे निःसंकोच अपनी समस्याएं साझा कर सकें
परिवार और समाज की भूमिका

अक्सर छात्र अपनी कठिनाइयों को खुले रूप में व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में माता-पिता और समाज को सजग रहना आवश्यक है:
- यदि बच्चा तनावग्रस्त दिखे, पढ़ाई से बचने की कोशिश करे या चिड़चिड़ाहट दिखाए तो इसे नजरअंदाज न करें
- परिवार और मित्रों को ऐसा वातावरण निर्मित करना चाहिए जहां छात्र बिना झिझक अपनी बातें कह सकें
- मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान गंभीरता से लेना होगा
निष्कर्ष
12 सितंबर 2025 की यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना न केवल पंतनगर विश्वविद्यालय बल्कि संपूर्ण शिक्षा जगत के लिए चेतावनी है। 20 वर्षीय नीरज, दरऊ किच्छा निवासी, अपने सपनों को साकार करने से पूर्व ही इस संसार को छोड़ गया।
यह घटना स्पष्ट करती है कि शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों के आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता का विकास भी होना चाहिए।
अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय, परिवार और समाज मिलकर ऐसा वातावरण निर्मित करें जहां कोई भी छात्र अकेला, हतोत्साहित या असहाय महसूस न करे।
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