उत्तर प्रदेश के कानपुर में अब मोहब्बत का इज़हार भी मुसलमानों के लिए जुर्म बना दिया गया है। बारावफ़ात से पहले लगाए गए “I LOVE MOHAMMAD” बोर्ड को मुद्दा बनाकर पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के दो दर्जन से ज़्यादा लोगों पर मुक़दमा दर्ज कर लिया है।

मुख्य बिंदु:
- कानपुर में ‘I LOVE MOHAMMAD’ बोर्ड लगाने पर 20+ लोगों पर FIR
- दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के बाद पुलिसिया कार्रवाई
- ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड ने कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना बताया
- संविधान की धारा 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला
मामला क्या है?
रावतपुर थाना क्षेत्र के सैयद नगर में बारावफ़ात से एक दिन पहले रोशनी में “I LOVE MOHAMMAD” का बोर्ड लगाया गया। इसे देखकर दक्षिणपंथी संगठन भड़क उठे और आपत्ति दर्ज कराई। अगले ही दिन जुलूस के दौरान कथित धार्मिक पोस्टर फाड़े जाने के मामले में रावतपुर पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। इस कार्रवाई के खिलाफ मुस्लिम संगठन लगातार विरोध जता रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
इस कार्रवाई को लेकर मुस्लिम संगठनों में नाराज़गी है। उनका कहना है कि जब किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई गई, तो सिर्फ दबाव में आकर पुलिस ने यह कदम क्यों उठाया? सवाल यह भी है कि क्या मोहब्बत जताना अब कानून तोड़ना माना जाएगा?
ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड का बयान
ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने पुलिसिया कार्रवाई को “ग़ैर-ज़िम्मेदाराना और हास्यास्पद” बताया। उन्होंने कहा:
भारत में कोई ऐसा कानून नहीं है कि अगर हम मर्यादा में रह कर किसी से मोहब्बत करते हैं और उसका इज़हार करते हैं, साथ ही स्टीकर या बोर्ड लगाते हैं, तो इसे जुर्म माना गया हो। जब जुर्म नहीं तो मुकदमा भी दर्ज नहीं कर सकते हैं।
– मोहम्मद सुलेमान, अध्यक्ष, ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड
उन्होंने कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि यह मुकदमा कुछ सिरफिरे नौजवानों के दबाव या शोरशराबे के कारण किया गया है। और इससे देश ही नहीं, पूरी दुनिया में गलत संदेश जाएगा।
मोहम्मद सुलेमान ने संविधान की धारा 25 का हवाला देते हुए कहा:
भारत की संविधान की धारा 25 हम सभी को यह इजाजत देता है कि किसी भी धर्म का पालन करें या किसी भी अराध्य में आस्था रखें, नबी से मोहब्बत करें और उसका इजहार करें। यह पुलिसिया कार्रवाई भद्दा मज़ाक है।
उन्होंने आगे कहा कि यह कार्रवाई न सिर्फ पूरे मुल्क में बल्कि दुनिया में मज़ाक का सबब बनेगी कि कानपुर की पुलिस इजहारे-मोहब्बत पर भी मुकदमा दायर कर देती है।
मुस्लिम लॉ बोर्ड के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस काम से किसी को तकलीफ नहीं है, न ही किसी की आस्था को चोट पहुंचाई गई है। उन्होंने कहा कि “हमने सिर्फ अपनी अकीदत के तहत मोहब्बत का इज़हार किया है।”
मुस्लिम समुदाय का विरोध

मुस्लिम समुदाय के लोग इस घटना से बेहद नाराज़ हैं और अपनी नाराज़गी को सोशल मीडिया पर स्टेटस और व्हाट्सऐप डीपी लगाकर शांतिपूर्ण तरीके से जता रहे हैं। उनका कहना है कि यह FIR पूरी तरह से बेकार और बेवक़ूफ़ी भरी है, क्योंकि इसमें न तो किसी की आस्था को ठेस पहुँचाई गई है और न ही किसी की धार्मिक भावनाओं का अपमान हुआ है।
समुदाय का सवाल है कि जब उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई जिन्होंने खुलेआम पोस्टर फाड़े, तो फिर केवल “I LOVE MOHAMMAD” लिखे बोर्ड लगाने वालों पर ही पुलिस ने क्यों कार्रवाई की?
मुस्लिम संगठनों का मानना है कि बहस इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि कोई समुदाय अपने त्योहार कैसे मनाए, बल्कि इस पर होनी चाहिए कि कानून सबके लिए बराबर क्यों नहीं है।
मोहम्मद सुलेमान ने नौजवानों से कहा कि उन्हें अपनी मोहब्बत का खुलकर इज़हार करना चाहिए और इसमें डरने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय कभी कानून नहीं तोड़ता और पुलिस बेवजह गुमराह करने वाले और कड़वे बयान दे रही है।
कानपुर की इस घटना ने एक अहम बहस खड़ी कर दी है—क्या धार्मिक आस्था और मोहब्बत का इज़हार करना भी अपराध की श्रेणी में डाला जा सकता है? मुस्लिम संगठन इसे पुलिस की बेवजह की सख्ती बता रहे हैं, जब किसी की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई गई, तो फिर केवल कुछ संगठनों के दबाव में पुलिस इस तरह की कार्रवाई क्यों कर रही है?
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